मौन की उर्जा



मौन ....
यानि चुप क्या बस इतना ही या और कुछ चुप से आगे भी ....
आदि काल से अनंत बार परीक्षित सुखी व् समृद्ध जीवन का सबसे सरल उपाय -- मौन
क्या मौन का भी कोई विज्ञानं है?

मै कहूँगा हाँ - मौन का ही तो सबसे गहरा विज्ञान है.
 सबसे आसान लेकिन सबसे कठिन ..
बड़ा आसान लगता है मौन हो जाना

मेरे प्यारे मित्र जरा सोचो कि मौन है क्या ?
केवल मुंह से कुछ न कहना चुप हो जाना  मौन नही है

चलिए आपके जीवन में सामान्य तौर पर घटने वाली एक घटना से इसे समझिये-
कभी किसी कारण से आप को लम्बी दूरी पैदल चलनी पड़ गई, इतनी लम्बी जितना आप तैयार नही थे , आप थक गये लेकिन फिर भी चलना पड़ा, और ज्यादा --और ज्यादा-- बस थोडा और ज्यादा......

क्या महसूस कर रहे थे आप की ज्यादा मेहनत करनी पड़ गई, उर्जा ज्यादा खर्च हो गई इसलिए थकान हो गई .. आप सही है ...बिलकुल सही...

बस बात इतनी सी है क्या आप एकाएक थक गए या कुछ थोड़ा  थोडा लगातार घटित हो रहा था आपके अंदर
यही देखने, महसूस करने और जानने की बात है..
आप की इस यात्रा की थकान तीन चरणों में घटित हुई है ...

१- पहला जब आपने यात्रा की शुरुआत की तब आप बोल रहे थे.
- गुस्से में
-फोन पर
-सहयात्री से
(यह चरण तब तक चलेगा जब तक आपके अंदर उठी तात्कालिक उर्जा ख़त्म नही हो जाती.)

२- दुसरे चरण में आप तब प्रवेश कर जाते है जब आप बोलना बंद करते है और स्वयं से मन ही मन बात करने लगते है. जिसे सामान्य तौर पर सोचना भी कहते है. इस चरण में आप पहले चरण की तुलना में ज्यादा समय तक रहेंगे क्योंकि इस चरण में आप की चेतन उर्जा खर्च हो रही है. आप को थकान का एहसास यहीं से शुरू हो जाता है . जैसे -जैसे आप विचारों में उलझते जाते है वैसे वैसे आपकी थकान बढ़ती जाती है.
 थोड़े ही समय मेंआप का मस्तिष्क विचारों के झंझावात से थकने लगता है और फिर विचारों का आवागमन कम होने लगता है
यानि
आप अब धीरे -धीरे तीसरे चरण में प्रवेश करेंगे-

३- तीसरा चरण -
-आपकी चेतन उर्जा समाप्त हो गई
-आपके मन में कोई विचार नही उठ रहा
-आप पूरी तरह अवचेतन उर्जा (मैे प्राकृतिक उर्जा कहता हूँ ) से संचालित होने लगे
-आपको थकान का एहसास नही हो रहा
-कदम स्वतः ही उठ गिर रहे है उसमे आप कोई प्रयास नही कर रहे

--इस परिस्थिति विशेष में आपके मन की जो अवस्था है वो मौन की अवस्था है... यही मौन है .. आपका मन मौन हो चुका है मुक्त हो चुके है.


किन्तु यह परिस्थिति वश मौन है . इसलिए यहाँ आप मौन तो है लेकिन यह मौन आपके लिए नई उर्जा का सृजन नही करेगा या न्यूनतम स्तर पर करेगा.
यदि यही मौन आपने अपने प्रयास से पाया होता तो..... मौन आपके लिए उच्चतम उर्जा सृजित करता जिसका उपयोग आप अपनी मर्जी से कर सकते .

मौन होना बहुत सरल है , मेरा विश्वास कीजिये बोलने से ज्यादा सरल ......



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