संदेश

July, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

संकल्प प्रणाम

चित्र
प्रिय मित्रों
संकल्प प्रणाम

मित्रों इस साईट को शुरू करने का ख्याल केवल दो कारणों से मेरे मन में आया. पहला तो ये की मुझे मेरी भाषा यानि हिंदी से बेहद लगाव है और पूरा प्रयास रहता है की सामान्य दिनचर्या, बातचीत, फेसबुक, अन्य सोशल मीडिया और लेखन में ज्यादा से ज्यादा हिंदी का उपयोग करूँ.

दूसरी बात ये की अभी भी इन्टरनेट पर अच्छा संकलन अंग्रेजी में ही ज्यादातर उपलब्ध है जिसका की ग्रामीण परिवेश और कम अंग्रेजी के जानकार बंधू पर्याप्त उपयोग नही कर पाते.

कई सारे मित्रो ने इस दिशा में कार्य किया है और लगातार कार्य हो भी रहा है किन्तु आप देख सकते है मौलिकता का अभाव साफ दिखाई पड़ता है ज्यादातर हर तरफ कॉपी पेस्ट ही नजर आता है.
इन्ही सब चीजों को देखते हुए मैंने ये मौलिक प्रयास शुरू किया है और यकीन कीजिये बिना आप के सक्रिय सहयोग के ये कार्य वांछित ऊंचाई तक नही पहुंचेगा.

अतः आपसे विनम्र अनुरोध है की --
*साईट पर लगातार निगाह रखे और कोई भी गलती होने पर तुरंत हमें आगाह करें.
*जो भी पोस्ट पसंद आये उसे अन्य माध्यमों पर शेयर करें.
*नई पोस्ट का विषय दे.
*प्रश्न पूछें.
*अपने विचार/ लेख भेजें हम उन्हें भी आपके …

प्रयत्न की निरंतरता

चित्र
क्या आप सफलता के लिए प्रयत्नशील है?

क्या आप सचमुच प्रयत्नशील है?

क्या आप सचमुच निरंतर प्रयत्नशील है?


जिस किसी से भी ये प्रश्न पूछा जायेगा सामान्य तौर पर हर किसी का उत्तर यही होगा की --हाँ

बिलकुल सही है ये उत्तर और निश्चित ही आप प्रयत्नशील होंगे भी अपने सपने को साकार करने के लिए. मै बस एक बहुत छोटी बात की तरफ आपका ध्यान दिलाना चाहता हूँ ताकि आप अपनी सफलता की तरफ ज्यादा तेजी के साथ कदम बढ़ा सकें.

एक छोटी बात की कल्पना कीजिये--

आपने एक गैस जलाई और बरतन में दूध उबलने के लिए रख दिया. आप भी वही बैठ गए.आपने एक काम किया की हर पांच मिनट के बाद गैस बर्नर को पांच सेकंड के लिए धीमा कर दिया फिर पांच मिनट के लिए तेज़ कर दिया फिर पांच सेकंड के लिए धीमा कर दिया....

मतलब-

तेज़.......धीमा.......तेज़........धीमा........तेज़...........धीमा.........तेज़..........धीमा...........


आप जानते है की ऐसा करने से क्या होगा.
हाँ मेरे प्यारे दोस्त वो दूध जो बहुत कम समय में उबल जाना चाहिए था वो जरुरत से ज्यादा समय लेगा या फिर शायद नही उबल पायेगा.
मेरे मित्र मै जो कहना चाहता हूँ वो आप समझ गए होंगे.
सफलता प्राप्त करने के लिए जो …

हमारा स्वभाव

चित्र
स्वभाव
आपका स्वभाव
कैसा है स्वभाव ?
स्वभाव= स्व + भाव = स्वयं का भाव ,
    स्वयं की स्थिति, मनोदशा,चरित्र,विचार, पारिवारिक मूल्य, अर्जित ज्ञान,व्यक्तिगत चिंतन और ऐसी ही बहुत सारी चीजों का सम्मिलित परिणाम होता है - हमारा स्वभाव

आपका स्वभाव कैसा है यह जानने वाले प्रथम व्यक्ति आप होते है उसके बाद ही दुनिया जानेगी. समय समय पर जैसे-जैसे हम जीवन यात्रा में आगे बढ़ते जाते है स्वभाव में परिवर्तन होता रहता है.
 बहुत थोड़े से प्रयास से यह जाना जा सकता है की आपका मूल स्वभाव कैसा है और उस पर ध्यान दे कर भरपूर बदलाव किया जा सकता है.

-शांत रहना
-बात-बात में क्रोधित हो जाना
-चंचलता
-झगडालू प्रवृत्ति
-चालाक होना
-जिज्ञासु होना
-सरल होना

      ऐसे ही बहुत से व्यक्ति हमारे चारों और है विभिन्न स्वभाव के.
आप थोडा गहरे चिंतन से जान सकते है की आपका स्वभाव कैसा है और मै कहूँगा की अवश्य जानिए . कोशिश कीजिये की आप अपने स्वभाव से सम्बंधित सभी बिन्दुओं पर ध्यान दे सके क्योंकि हमारे जीवन की ख़ुशी हमारे इसी स्वभाव पर सबसे ज्यादा निर्भर होती है.
   यह हमारा स्वभाव ही है जो हमें प्रेरित करता है की हमारे निर्णय क्या हो…

संकल्प

चित्र
संकल्प
संकल्प -- इस शब्द को आपने भी कई बार पढ़ा होगा, सुना होगा  मैंने भी बहुत बार पढ़ा है, सुना है, चर्चा की है...
हर तरफ इस शब्द से सम्बंधित सामग्री उपलब्ध है, जब भी कभी सफलता से सम्बंधित कोई भी बात चलती है तो संकल्प को सभी सफलता का मूल तत्व कहा जाता है. --लेकिन संकल्प क्या है - -एक प्रक्रिया  -एक यात्रा -एक स्थिति     या कुछ और . इस पर कोई सर्व मान्य परिभाषा मै प्राप्त नही कर सका. क्या आपको प्राप्त हुई ? मैंने अपने जीवन में संकल्प का जो अर्थ समझा वो आपसे साझा कर रहा हूँ....
जब भी आपकी कोई कल्पना इतनी घनीभूत हो जाये की वह आपकी सांसों से संयुक्त हो जाये तो वह आपका संकल्प बन जाती है.
ऐसी कोई भी बात , घटना, या इच्छा जो आपको स्वयं में इतना सराबोर कर ले की आप समय को भूल जाएँ, शोक से परे हो जाएँ - तत्कालीन परिस्थिति को भूल जाएँ , भीड़ में हो या अकेले हर पल वह विचार आपके मन को मथता रहे, ........ तो याद रहे की आप संकल्प की प्रक्रिया में हैं.
अब आपके दो रास्ते है पहला आप उस विचार से बाहर आ जाएँ. ये थोडा सा ही मुश्किल और बहुत आसान है. हमारे चारो तरफ राय देने वालों की भरमार है . किन्ही चार लोंगो …

आप यहाँ क्यों है?

चित्र
आप यहाँ क्यों है?
हम यहाँ क्यों है?
हम सब यहाँ क्यों है ?
प्रकृति में हर चीज जहाँ है वहां क्यों है?

यह प्रश्न अनादी काल से प्रत्येक व्यक्ति के मन में कभी न कभी आता जरुर है .....केवल आता ही नही बल्कि गूंजता है और कई बार परेशान करने की हद तक गूंजता है..... परिणामतः ...?

ज्यादातर लोग सर झटक कर इस विचार से ही मुक्ति पा लेते  है
कुछ लोग इसे तनाव का नाम देते है
कुछ लोग मनोरंजन नाम की दवा का इस्तेमाल करते है
कुछ लोग इसे ईश्वर की मर्जी मानते है

बहुत कम लोग इस बात को गंभीरता से लेते है , इस बिंदु पर चर्चा करते है और गहराई से जानने का प्रयास करतें है और अपने प्रयास के अनुरूप उन्हें अपने प्रश्न का उत्तर भी प्राप्त होता है.
इन्ही लोंगो में से जिन्हें उत्तर प्राप्त होता है उनका आचार, विचार, व्यवहार सब बदल जाता है और हम उन्हें सफल व्यक्ति के रूप में जानते है और महान व्यक्ति का दर्जा देते है.

तो क्या आपके मन में कभी ये ख्याल आया की आप यहाँ क्यों है?

पूरी प्रकृति में कुछ भी फालतू नहीं है . हर चीज के होने का कारण है ...

क्षान्दोग्योपनिषद के एक सूत्र के मुताबिक-

इस सृष्टि में जितनी वनस्पतियाँ है वो सभ…

मौन की उर्जा

चित्र
मौन ....
यानि चुप क्या बस इतना ही या और कुछ चुप से आगे भी ....
आदि काल से अनंत बार परीक्षित सुखी व् समृद्ध जीवन का सबसे सरल उपाय -- मौन
क्या मौन का भी कोई विज्ञानं है?

मै कहूँगा हाँ - मौन का ही तो सबसे गहरा विज्ञान है.
 सबसे आसान लेकिन सबसे कठिन ..
बड़ा आसान लगता है मौन हो जाना

मेरे प्यारे मित्र जरा सोचो कि मौन है क्या ?
केवल मुंह से कुछ न कहना चुप हो जाना  मौन नही है

चलिए आपके जीवन में सामान्य तौर पर घटने वाली एक घटना से इसे समझिये-
कभी किसी कारण से आप को लम्बी दूरी पैदल चलनी पड़ गई, इतनी लम्बी जितना आप तैयार नही थे , आप थक गये लेकिन फिर भी चलना पड़ा, और ज्यादा --और ज्यादा-- बस थोडा और ज्यादा......

क्या महसूस कर रहे थे आप की ज्यादा मेहनत करनी पड़ गई, उर्जा ज्यादा खर्च हो गई इसलिए थकान हो गई .. आप सही है ...बिलकुल सही...

बस बात इतनी सी है क्या आप एकाएक थक गए या कुछ थोड़ा  थोडा लगातार घटित हो रहा था आपके अंदर
यही देखने, महसूस करने और जानने की बात है..
आप की इस यात्रा की थकान तीन चरणों में घटित हुई है ...

१- पहला जब आपने यात्रा की शुरुआत की तब आप बोल रहे थे.
- गुस्से में
-फोन पर
-सहयात्री से

संयम - साधना का प्रथम सोपान

चित्र
साधना का सूत्र है संयम 
**********************
राम-रावण युद्ध से पूर्व विभीषण चिंतित होकर राम से पूछते हैं कि,
हे राम ! न तो आपके पास रथ है और न तन की रक्षा के लिए कवच और न जूते ही, तब रथ पर सवार बलवान रावण को कैसे जीता जाएगा ? श्री राम जी कहते हैं कि जिससे विजय होती है वह दूसरा ही रथ होता है। उस रथ की व्याख्या करते हुए प्रभु श्री रामचन्द्र जी कहते हैं -
अमल अचल मन त्रोन समाना।
सम जम नियम सिलीमुख नाना॥
... अर्थात् संसार रूपी युद्ध को जीतने के लिए निर्मल और स्थिर मन तरकश के समान है। शम अर्थात् मन का वश में होना तथा यम और नियम ये बहुत से बाण हैं। इनके समान विजय का दूसरा उपाय नहीं है। मन पर नियंत्रण का अर्थ भावों का दमन नहीं, अपितु उनका परिष्कार करना है। उदात्त मूल्यों से युक्त सकारात्मक भावों द्वारा ही सतही या अनुपयोगी व घातक भावों से मुक्ति संभव है। इसके लिए सकारात्मक भावों को दृढ़ से दृढ़तर करते जाना अनिवार्य है। यही वास्तविक विजय है, यही साधना है। हमारे व्यवहार के मूल में हमारे विचार ही होते हैं और विचारों का उद्गम होता है हमारा मन। वास्तव में मन की साधना ही वास्तविक साधना है। जब हम संयम …

बाज़ और आपकी उडान

चित्र
बाज से सीखिए नेटवर्क मार्केटिंग क्या आपने कभी ऊँचाइयों पर अकेले बाज़ को उड़ते देखा है ? वो नीचे के छोटे मोटे खतरों से कितना ऊपर उठ कर अधिक ऊँचाइयों पर जाने के लिए तैयार होता है| उसे सुंदर दृश्यों से ऊपर अपने लक्ष्य की और सीमा हीन आकाश में उड़ते समय कितनी शक्ति और कितना आनंद महसूस होता होगा|


वह सच में अपने इलाके, अपनी जिंदगी का स्वामी होता है| ज़रा सोचिये!, अगर आप भी अपनी जिंदगी में वैसी ही अनंत उड़ान भर पाये तो कैसा हो| जिन ऊँचाइयों पर जाने से लोग डरते हैं उन ऊँचाइयों पर पहुँचने कि कल्पना करें | (eagle) बाज़ जैसी आज़ाद जिंदगी जीने के लिए और अपने सपनों को हासिल करने के लिए आपको अपनी बनाई हुई सीमाओं से मुक्त होना होगा|
आइए इस महान पक्षी से सीखते हैं सफलताके 7 गुण जिनको हम अपने नेटवर्क मार्केटिंग बिजनेस में अपना कर सफलता कि ऊँचाइयों को छू सकें |

बाज़ हमेशा बाज़ के साथ उड़ते हैं
बाज़ बहुत ऊँचाई पर हमेशा अकेले उड़ते हैं | वो कभी चिड़िया, तोते, या किसी और पक्षी के साथ उड़ना पसंद नही करते |
सभी पक्षी, जिनके पंख होते हैं, वो झुंड में उड़ते हैं लेकिन eagle यानी बाज़ इन सबसे ज्यादा ऊँचाई पर, ह…