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चलो शुरू करें...

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चलो शुरू करे....


हममे मे से ज़्यादातर लोग जीवन मे कुछ बड़ा करना चाहते है।
वो इसके लिए पर्याप्त सोचते है, खूब प्लानिंग करते है लेकिन आखिर ऐसी क्या बात हो जाती है की सफल नही हो पाते?
क्या अपने कभी इसपर विचार किया?
सोचिए कहाँ गलती हो जाती है?
अच्छा इसी बात को दूसरे तरीके से कहता हूँ...
सफल होने के लिए प्लान का सबसे जरूरी हिस्सा क्या है?
इसे शुरू से डिस्कस करते है...
सबसे पहले तो एक आप एक विचार लेते है की“क्या करना है?”बहुत महत्वपूर्ण सवाल है ये की क्या करना है? वो जो आपका सपना है या वो जो आपके सामने है?
क्या करना है यह निश्चित करने के बाद दूसरी बात आती है “क्यो करना है?”यदि आपके पास किसी काम को करने का सही कारण नही है तो बहुत समय तक आप उसे नही कर पाएंगे, ऊब जाएंगे... अब इतना तो आप भी जानते है की जिस काम को करने मे आपका मन ही नही लगेगा उसमे सफल होने की कल्पना भी व्यर्थ है।
“क्या” और “क्यों” का निर्णय करने के बाद बात आती है “कैसे करना है?”इस प्रश्न के उत्तर मे आप अपने काम से संबन्धित रिसर्च करते है.... सफलता की संभावना.......सफलता मे लगने वाला समय........ राह मे आने वाली संभावित मुश्किलें....... आपकी…

"सरकारी" और "प्राइवेट"

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         "सरकारी" और "प्राइवेट" "सरकारी" और "प्राइवेट" केवल नौकरियों के लिए इस्तेमाल होने वाले जुमले नहीं हैं . ये दो ज़िन्दगी जीने के ढर्रे हैं , दो विचारधाराएँ हैं , दो मनोदशाएँ हैं .
हमारे कॉलेज का एक मित्र सरकारी सोच वाला था . ढीले ढाले कपड़े , ढीली ढाली दिनचर्या और ढीली ढाली सोच . कॉलेज की लगभग सभी लडकियां उन्हें अच्छी लगतीं थीं . बैचमेट , सीनियर और जूनियर तो मिथ्या वर्गीकरण की श्रेणियां भर थीं . उनके सरकारी मन को जी.एच के हर कमरे में प्रेयसी दिखी . मगर इश्क की फ़ाइल कुछ इतना धीरे धीरे खिसकी कि उन सभी से मुलाक़ात हकीकत या तो बन नहीं पायी या आज कल बच्चों और पतियों के साथ होती है .
हमारे दोस्त की अरेंज्ड शादी हुई . ज्यादातर सरकारी सोच वालों की ज़िन्दगी इसी रास्ते आगे बढ़ती है . भाभीजी एकदम प्राइवेट विचारधारा की थीं . हमेशा "हेप" बनकर घूमतीं थीं . पत्नीपना उनके अन्दर झलका ही नहीं . हमेशा वे हमारे सरकारी दोस्त की प्रेमिका बन कर रहीं . चुस्त कपड़े , चुस्त बातें और बातों के चुस्त जवाब .
मैंने एक दिन भाभीजी से पूछा ; आपको इस "रोडवेज की …

क्या सच में आप संकल्पित हैं?

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ठहर कर  एक बार सोचो दोस्त की क्या आप सचमुच अपने सपने को लेकर संकल्पित है ?

संकल्प प्रणाम

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प्रिय मित्रों
संकल्प प्रणाम

मित्रों इस साईट को शुरू करने का ख्याल केवल दो कारणों से मेरे मन में आया. पहला तो ये की मुझे मेरी भाषा यानि हिंदी से बेहद लगाव है और पूरा प्रयास रहता है की सामान्य दिनचर्या, बातचीत, फेसबुक, अन्य सोशल मीडिया और लेखन में ज्यादा से ज्यादा हिंदी का उपयोग करूँ.

दूसरी बात ये की अभी भी इन्टरनेट पर अच्छा संकलन अंग्रेजी में ही ज्यादातर उपलब्ध है जिसका की ग्रामीण परिवेश और कम अंग्रेजी के जानकार बंधू पर्याप्त उपयोग नही कर पाते.

कई सारे मित्रो ने इस दिशा में कार्य किया है और लगातार कार्य हो भी रहा है किन्तु आप देख सकते है मौलिकता का अभाव साफ दिखाई पड़ता है ज्यादातर हर तरफ कॉपी पेस्ट ही नजर आता है.
इन्ही सब चीजों को देखते हुए मैंने ये मौलिक प्रयास शुरू किया है और यकीन कीजिये बिना आप के सक्रिय सहयोग के ये कार्य वांछित ऊंचाई तक नही पहुंचेगा.

अतः आपसे विनम्र अनुरोध है की --
*साईट पर लगातार निगाह रखे और कोई भी गलती होने पर तुरंत हमें आगाह करें.
*जो भी पोस्ट पसंद आये उसे अन्य माध्यमों पर शेयर करें.
*नई पोस्ट का विषय दे.
*प्रश्न पूछें.
*अपने विचार/ लेख भेजें हम उन्हें भी आपके …

प्रयत्न की निरंतरता

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क्या आप सफलता के लिए प्रयत्नशील है?

क्या आप सचमुच प्रयत्नशील है?

क्या आप सचमुच निरंतर प्रयत्नशील है?


जिस किसी से भी ये प्रश्न पूछा जायेगा सामान्य तौर पर हर किसी का उत्तर यही होगा की --हाँ

बिलकुल सही है ये उत्तर और निश्चित ही आप प्रयत्नशील होंगे भी अपने सपने को साकार करने के लिए. मै बस एक बहुत छोटी बात की तरफ आपका ध्यान दिलाना चाहता हूँ ताकि आप अपनी सफलता की तरफ ज्यादा तेजी के साथ कदम बढ़ा सकें.

एक छोटी बात की कल्पना कीजिये--

आपने एक गैस जलाई और बरतन में दूध उबलने के लिए रख दिया. आप भी वही बैठ गए.आपने एक काम किया की हर पांच मिनट के बाद गैस बर्नर को पांच सेकंड के लिए धीमा कर दिया फिर पांच मिनट के लिए तेज़ कर दिया फिर पांच सेकंड के लिए धीमा कर दिया....

मतलब-

तेज़.......धीमा.......तेज़........धीमा........तेज़...........धीमा.........तेज़..........धीमा...........


आप जानते है की ऐसा करने से क्या होगा.
हाँ मेरे प्यारे दोस्त वो दूध जो बहुत कम समय में उबल जाना चाहिए था वो जरुरत से ज्यादा समय लेगा या फिर शायद नही उबल पायेगा.
मेरे मित्र मै जो कहना चाहता हूँ वो आप समझ गए होंगे.
सफलता प्राप्त करने के लिए जो …

हमारा स्वभाव

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स्वभाव
आपका स्वभाव
कैसा है स्वभाव ?
स्वभाव= स्व + भाव = स्वयं का भाव ,
    स्वयं की स्थिति, मनोदशा,चरित्र,विचार, पारिवारिक मूल्य, अर्जित ज्ञान,व्यक्तिगत चिंतन और ऐसी ही बहुत सारी चीजों का सम्मिलित परिणाम होता है - हमारा स्वभाव

आपका स्वभाव कैसा है यह जानने वाले प्रथम व्यक्ति आप होते है उसके बाद ही दुनिया जानेगी. समय समय पर जैसे-जैसे हम जीवन यात्रा में आगे बढ़ते जाते है स्वभाव में परिवर्तन होता रहता है.
 बहुत थोड़े से प्रयास से यह जाना जा सकता है की आपका मूल स्वभाव कैसा है और उस पर ध्यान दे कर भरपूर बदलाव किया जा सकता है.

-शांत रहना
-बात-बात में क्रोधित हो जाना
-चंचलता
-झगडालू प्रवृत्ति
-चालाक होना
-जिज्ञासु होना
-सरल होना

      ऐसे ही बहुत से व्यक्ति हमारे चारों और है विभिन्न स्वभाव के.
आप थोडा गहरे चिंतन से जान सकते है की आपका स्वभाव कैसा है और मै कहूँगा की अवश्य जानिए . कोशिश कीजिये की आप अपने स्वभाव से सम्बंधित सभी बिन्दुओं पर ध्यान दे सके क्योंकि हमारे जीवन की ख़ुशी हमारे इसी स्वभाव पर सबसे ज्यादा निर्भर होती है.
   यह हमारा स्वभाव ही है जो हमें प्रेरित करता है की हमारे निर्णय क्या हो…

संकल्प

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संकल्प
संकल्प -- इस शब्द को आपने भी कई बार पढ़ा होगा, सुना होगा  मैंने भी बहुत बार पढ़ा है, सुना है, चर्चा की है...
हर तरफ इस शब्द से सम्बंधित सामग्री उपलब्ध है, जब भी कभी सफलता से सम्बंधित कोई भी बात चलती है तो संकल्प को सभी सफलता का मूल तत्व कहा जाता है. --लेकिन संकल्प क्या है - -एक प्रक्रिया  -एक यात्रा -एक स्थिति     या कुछ और . इस पर कोई सर्व मान्य परिभाषा मै प्राप्त नही कर सका. क्या आपको प्राप्त हुई ? मैंने अपने जीवन में संकल्प का जो अर्थ समझा वो आपसे साझा कर रहा हूँ....
जब भी आपकी कोई कल्पना इतनी घनीभूत हो जाये की वह आपकी सांसों से संयुक्त हो जाये तो वह आपका संकल्प बन जाती है.
ऐसी कोई भी बात , घटना, या इच्छा जो आपको स्वयं में इतना सराबोर कर ले की आप समय को भूल जाएँ, शोक से परे हो जाएँ - तत्कालीन परिस्थिति को भूल जाएँ , भीड़ में हो या अकेले हर पल वह विचार आपके मन को मथता रहे, ........ तो याद रहे की आप संकल्प की प्रक्रिया में हैं.
अब आपके दो रास्ते है पहला आप उस विचार से बाहर आ जाएँ. ये थोडा सा ही मुश्किल और बहुत आसान है. हमारे चारो तरफ राय देने वालों की भरमार है . किन्ही चार लोंगो …